विधी
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  • विधी
    पूजा विधी       
  • संध्या विधी

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • तिलक धारण

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • पवित्रीधारण

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • जप-विधि
    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।
  • संध्याका समय

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • संध्यास्तुति

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • संध्योपासन-विधि

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • सूर्यार्घ्य-विधि

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • गायत्री ध्यान

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • मध्याह्न-संध्या

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • सायं-संध्या

    रात या दिनमें जो भी अज्ञानवश विकर्म हो जायँ, वे त्रिकाल-संध्या करनेसे नष्ट हो जाते है।

  • गर्भाधान संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • गर्भाधान - उचित काल

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • यज्ञ विधी

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • ईश्वरोपासना

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • गृहाश्रम संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • पुंसवन संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • सीमन्तोन्नयन संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • जातकर्म संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • नामकरण संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • निष्क्रमण संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • अन्नप्राशन संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • चूडाकरण संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • कर्णवेध संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • उपनयन संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • वेदारंभ संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • समावर्तन संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • विवाह संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • वानप्रस्थ संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • अंत्येष्टि संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • सोलह संस्कार

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • सामान्य संस्कार विधी

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • ईश्वरोपासना

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • यज्ञकुण्ड तथा द्रव्याहुति का प्रमाण

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • विवाह होम

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • मन्त्र पठण

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • वामदेव्य गान

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • स्थान तथा काल-मान

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • उपोद्‌घात

    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।

  • विधी

    All main Vidhis/ procedures that you perform.

  • कर्म विधी
    कर्म विधी - Vidhi by Karma
  • श्राद्ध कर्म
    श्राद्ध कर्म
  • पूजा विधी
    पूजा व कथा
    Hindu Pooja Vidhis. The rituals that can be performed during worship of Hindu Gods, Godesses. This collection might contain some of the..
  • नवरात्र पूजा : घटस्थापना
    नवरात्र पूजा विधी : घटस्थापना
  • माहात्म्य

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

    Navratri is a Hindu..

  • अथ मानस पूजा

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

    Navratri is a Hindu..

  • विजयादशमी कथा

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

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  • देवी पूजा विधी

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

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  • घटस्थापना

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

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  • नवदुर्गा स्थापना

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

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  • सायंकाळची पूजा

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

    Navratri is a Hindu..

  • हवन विधी आणि बलिदान

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

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  • उत्थापन आणि विसर्जन

    घटस्थापना किंवा नवरात्रोत्सव म्हणजे ब्रह्मांडातील आदिमायेची आश्विन महिन्यात नंदादीप तेवत ठेऊन मनोभावे पूजा करणे.

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  • रुद्राक्ष धारण विधी

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • रुद्राक्ष महिमा व इतिहास

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • रुद्राक्षाची महती व सामर्थ्य

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • रुद्राक्षाचे शुभाशुभ प्रकार

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • रुद्राक्षाचे मुखांप्रमाणे सामर्थ्य

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • रुद्राक्ष माला विधान

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • माला निर्माण विधी

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • रुद्राक्ष माला भावित

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • माला पूजा विधी

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • पाळावयाचे नियम

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • मंत्रजपाचे नियम

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • अंगानुसार रुद्राक्षधारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • एकमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • द्विमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • त्रिमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • चतुर्मुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • पंचमुखी रुद्राक्ष धारण मन्‍त्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • षण्मुखी रुद्राक्ष धारण मन्‍त्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • सप्‍तमुखी रुद्राक्ष धारण मन्‍त्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • अष्‍टमुखी रुद्राक्ष धारण मन्‍त्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • नवमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • दशमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • एकादशमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • द्वादशमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • त्रयोदशमुखी रुद्राक्ष धारण मन्त्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • चतुर्दशमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • गायत्रीमंत्र व रुद्राक्ष-धारण

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • पंचदेव जप साधना

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • विशिष्‍ट शिवमंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • विष्णु-गायत्री मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • शक्‍तिसाधना मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • सूर्य गायत्री मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • गणपती गायत्री मंत्र

    रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, शंकरांना अत्यंत प्रिय, तसेच दर्शन, स्पर्श व जप द्वारा सर्व पापे नष्ट होतात.

  • शिवमानसपूजा

    Hindu Pooja Vidhis. The rituals that can be performed during worship of Hindu Gods, Godesses. This collection might contain some of the day specif..

  • श्रीअष्टपुत्रा महालक्ष्मी पाठ

    पूजा व कथा
    Hindu Pooja Vidhis. The rituals that can be performed during worship of Hindu Gods, Godesses. This collection might contain some of ..

  • विवाह विधी - आवश्यक साहित्य

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • वाङ्‌निश्चय

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • सीमान्तपूजन

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • विवाहपूर्वकृत्य

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • वराचे वधूगृही गमन

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • मधुपर्क-पूजन

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • गौरीहर-पूजा

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • कन्यादानार्थं उदकशुद्धिः

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • वधूवरांचे परस्परनिरीक्षण (विवाह)

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • कन्यादान

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • अक्षतारोपण

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • विवाहहोम

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • ऐरिणीप्रदान (झाल)

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • गृहप्रवेशनीय होम(गृहप्रवेश)

    विवाह संस्कार सोळा संस्कारांपैकी एक आहे. विवाह फक्त शारीरिक संबंध नसून, वंशवृद्धी हे प्रमुख कारण आहे.

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  • शांती विधी
    Shanti Vidhi Shanti Vidhi Shanti Vidhi
  • नक्षत्र जनन शांती

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.

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  • जननशांती शास्त्रार्थ

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • पूजा साहित्य

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • पंचगव्य मेलन

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • कुलदेवता, ग्रामदेवता, स्थानदेवता, संकल्प

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • महागणपती पूजनम्

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • पुण्याहवाचनम्

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • मातृका पूजनम्

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • नांदी श्राद्ध

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • आचार्य वरणम् व महिम्नः

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • मूर्तीची प्राणप्रतिष्ठा व गोप्रसव शांती

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • २४ नक्षत्रे व नक्षत्र देवता

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • आश्लेषा नक्षत्र देवता स्थापन

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • ज्येष्ठा नक्षत्र देवता स्थापन

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • नवग्रह कलश स्थापन

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • अग्निमुख / स्थंडिलकर्म

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • अन्वाधान

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • पात्रासाधनम्

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • अग्निची पूजा, होम, हवनारंभ

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • आदित्यादि नवग्रह देवता स्थापन

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • स्विष्‍टकृत, प्रायश्चित्ताज्य होम

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • गृह बलिदानम्

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
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  • क्षेत्रपाल पूजनम् आणि पूर्णाहुति

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
    Performing yagna to the bir..

  • आचार्य-विभूति धारणम्

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
    Performing yagna to the bir..

  • यजमान कुटुंबियांवर अभिषेक

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
    Performing yagna to the bir..

  • यजमान अग्नीची पूजा

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
    Performing yagna to the bir..

  • पीठ दान

    मूळ, आश्लेषा आणि ज्येष्ठा नक्षत्राच्या कोणत्याही चरणावर जन्मलेल्या बालकाची ब्राम्हणाकडून मंदिरात शांती करून घ्यावी.
    Performing yagna to the bir..

  • वास्तु्शांती

    वास्तु्शांती म्हणजे वास्तु उभारताना यजमानाच्या हातून विविध चुका होतात किंवा दोष घडतात, त्यांची शांती. वास्तुपुरुषाची शांती नव्हे.

    While ent..

  • धर्मशास्त्रीय संकेत

    वास्तु्शांती म्हणजे वास्तु उभारताना यजमानाच्या हातून विविध चुका होतात किंवा दोष घडतात, त्यांची शांती. वास्तुपुरुषाची शांती नव्हे.

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  • वास्तुशांति पूजा साहित्य

    वास्तु्शांती म्हणजे वास्तु उभारताना यजमानाच्या हातून विविध चुका होतात किंवा दोष घडतात, त्यांची शांती. वास्तुपुरुषाची शांती नव्हे.

  • यज्ञोपवीत धारण विधी

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  • पंचगव्य मेलन

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  • कुल, ग्राम, स्थानदेवता पूजन, वास्तुपूजन

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  • संकल्प

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  • महागणपती पूजन

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  • पुण्याहवाचन

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  • मातृका पूजन

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  • नांदी श्राद्ध

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  • आचार्य वरणम्

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  • खिळे रोवण्याचे मंत्र

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  • रेखा करणम्

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  • मूर्तीची प्राणप्रतिष्ठा

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  • शिख्यादि देवता स्थापनम्

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  • चरक्यादि देवता

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  • कलश स्थापन

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  • क्रतु देवता

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  • स्थंडिलकर्म

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  • यजमान संकल्प

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  • इंद्रादि देवता

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  • स्विष्टकृत

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  • गृहबलिदानम्

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  • क्षेत्रपाल पूजनम्

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  • पूर्णाहुति

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  • अग्नीची प्रार्थना

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  • यजमान कुटुंबियांवर अभिषेक

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  • अग्नीची प्रार्थना

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  • स्थापित देवता विसर्जनम्

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  • श्रेयः संपादनम्

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  • धरा पूजन

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  • वास्तु प्रतिमा निक्षेप

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  • गृहप्रवेश

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  • पंचगव्याचे मंत्र

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  • जोगेश्वरी मातेचे व्रत

    जोगेश्‍वरी मातेचा नवाक्षरी मंत्र अत्यंत प्रभावी आहे.

  • संकल्प

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  • जोगेश्‍वरी मातेची कहाणी

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  • जोगेश्वरी महात्म्य-पाठ

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  • जोगेश्वरी महात्म्य

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  • जोगेश्वरीची आरती

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  • आदिशक्‍ति भवानी स्तोत्र

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  • जोगवा

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